हिमायतनगर, एम.अनिलकुमार | नांदेड जिले में आनेवाले हिमायतनगर तहसील के ग्राम सरसम से दरेसरसम तक बनी नई डामरी सड़क अब विकास का नहीं, बल्कि सीधे मौत का रास्ता बनती जा रही है। सड़क किनारे बिना किसी सोच-समझ के खड़े किए गए सीमेंट बैरिकेड (कंक्रीट खंभे) हर गुजरते वाहन को हादसे की दहलीज पर खड़ा कर रहे हैं।

हैरानी की बात यह है कि, इन खतरनाक बैरिकेड्स पर न रिफ्लेक्टर हैं, न चेतावनी बोर्ड, न ही कोई लाइट व्यवस्था। रात के अंधेरे में ये सफेद खंभे अचानक सामने आते हैं और चालक को संभलने का मौका तक नहीं मिलता। खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह सड़क किसी ‘डेथ ट्रैप’ से कम नहीं।

स्थानीय लोगों का साफ आरोप है कि, यह काम गुणवत्ता के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ बिल पास करवाने के लिए किया गया है। “मार्च एंड से पहले पैसे निकालने की जल्दी में ठेकेदार ने नियमों की धज्जियां उड़ा दीं,” ऐसा आक्रोशित नागरिकों का कहना है । इससे भी गंभीर बात यह कि संबंधित विभाग के इंजीनियरों ने सब कुछ देखते हुए भी आंखें मूंद लीं… क्या यह मिलीभगत है?


खामियों की लंबी लिस्ट : सड़क किनारे बिना सुरक्षा के खड़े जानलेवा बैरिकेड जिसपे रिफ्लेक्टर, लाइट और साइनबोर्ड का नामोनिशान नहीं है, जगह-जगह उखड़ती सड़क, घटिया निर्माण की पोल खोलती है, रस्ते में निर्माण कीय पुलिया कहीं ऊंचा, कहीं सड़क नीची ऐसा सडक का पूरा काम बेतरतीब है| इससे आम जनता का सीधा सवाल है कि, “क्या किसी की जान जाने के बाद ही प्रशासन जागेगा?”
जनता की सख्त मांग : इस बात को ध्यान में राखते हुये जनता द्वारा मांग है की, तुरंत सुरक्षा इंतजाम,रिफ्लेक्टर, लाइट और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं, ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो,सड़क की तकनीकी जांच कर दोषियों को बेनकाब किया जाए, पूरे काम का पुनर्मूल्यांकन कर सुधार किया जाए|
गुस्साए ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि, अगर जल्द से जल्द रस्ता निर्माण और सुरक्षा कार्य में सुधार नहीं हुआ और कोई बड़ा हादसा हुआ, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी ठेकेदार और संबंधित इंजिनियर अधिकारी ही होंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन नींद से जागता है या फिर किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार करता है!
