हिमायतनगर, एम. अनिलकुमार | करोड़ों रुपये के विकास कार्यों का दावा करने वाला हिमायतनगर रेलवे स्टेशन हकीकत में अव्यवस्था, लापरवाही और घटिया काम का जीता-जागता उदाहरण बन गया है। अंतिम चरण में होने का दावा किए जा रहे कामों की सच्चाई यह है कि यात्रियों को आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझना पड़ रहा है। ठेकेदार और रेलवे प्रशासन की मिलीभगत या घोर लापरवाही के कारण पूरे प्रोजेक्ट पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर अब तक कोच पोजीशन बताने वाले डिजिटल डिस्प्ले तक नहीं लगाए गए हैं, जिससे यात्रियों को अंधेरे में रखा जा रहा है। पीने के पानी जैसी प्राथमिक सुविधा भी नदारद है, जो प्रशासन की संवेदनहीनता को उजागर करती है।
प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर किए गए तथाकथित “नवीनीकरण” की गुणवत्ता इतनी खराब है कि छत से पानी टपक रहा है। एक तरफ यात्रियों को पानी नहीं मिल रहा, तो दूसरी तरफ नलों से पानी की खुलेआम बर्बादी हो रही है, यह लापरवाही नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता है।
स्टेशन पर ट्रेनों के आगमन की जानकारी देने वाले डिजिटल डिस्प्ले भी उपलब्ध नहीं हैं, जिससे यात्रियों को समय की जानकारी नहीं मिल पा रही। कोरोना काल से बंद पड़ी पार्सल ऑफिस सेवा भी अब तक शुरू नहीं की गई है।
साथ ही, स्टेशन परिसर में चल रहे सीमेंट-कंक्रीट सड़क निर्माण के दौरान कई जगह लोहे की रॉड खुली छोड़ दी गई हैं, जिससे यात्रियों के घायल होने की घटनाएं सामने आई हैं। निर्माण कार्य के दौरान वैकल्पिक व्यवस्था न होने से यात्रियों की परेशानी और बढ़ गई है। वाहन पार्किंग के लिए शेड बनाने की योजना के बावजूद अभी तक यह काम अधूरा है, जिससे गर्मी में वाहन तप रहे हैं और बारिश में भीगने का खतरा बना हुआ है।
स्थानीय नागरिकों ने स्टेशन परिसर में पुलिस चौकी स्थापित करने, चोरी की घटनाओं पर रोक लगाने, धनबाद एक्सप्रेस को ठहराव देने और बंद की गई काजीपेठ एक्सप्रेस को फिर से शुरू करने की मांग की है। कुल मिलाकर, विकास कार्यों के दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर नजर आ रहा है। यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से जल्द से जल्द इन समस्याओं का समाधान कर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
निरीक्षण के बाद भी नहीं सुधरा काम
हिमायतनगर रेलवे स्टेशन पर चल रहे विकास कार्यों को लेकर पहले से उठ रहे सवाल अब और गंभीर होते जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि, विगत माह में सिकंद्राबाद के वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की लगातार निरीक्षण के बावजूद भी काम के स्तर में कोई सुधार दिखाई नहीं दे रहा है, जिससे रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सीधा सवाल खड़ा हो रहा है।
छह माह पूर्व में हिंगोली के सांसद नागेश पाटील आष्टीकर ने स्टेशन का दौरा कर निर्माण कार्यों का जायजा लिया था और संबंधित ठेकेदार व इंजीनियर को गुणवत्ता सुधारने के सख्त निर्देश दिए थे। इसके बाद विभागीय प्रबंधक ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति की समीक्षा की और आवश्यक निर्देश जारी किए। लेकिन इन तमाम निरीक्षणों और सख्त हिदायतों के बावजूद जमीनी हकीकत जस की तस बनी हुई है। काम उसी लापरवाही और घटिया तरीके से किया जा रहा है, जिससे साफ जाहिर होता है कि निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया गया।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि विकास कार्यों के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है और जनता को गुमराह किया जा रहा है। एक ओर उच्च अधिकारियों की सख्त चेतावनी, तो दूसरी ओर घटिया स्तर का काम इस विरोधाभास ने रेलवे प्रशासन की नीयत और कार्यशैली दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुल मिलाकर, यह पूरा मामला अब केवल लापरवाही तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि जिम्मेदारी तय करने और ठोस कार्रवाई की मांग तेज होती जा रही है।


